Saturday, May 23, 2015
Friday, May 22, 2015
Subscribe to:
Comments (Atom)
zindgi mei ab or koi chahat nahi ...... ae bewafa mujhe teri ab chahat nahi
-
तरस गए हम तुमसे दो पल की गुफ्त-गु के लिए और लोग कहते हैं की तुम बोलते बहुत हो।. . . . . भावना
-
अधूरे है हम तेरे बिना ये बात अब खुदसे भी छिपायँगे तरसोगे हमसे मिलने के लिए हम तुझसे दूर अब इतने चले जायेंगे
-
तू चाहिए बस तेरा साथ चाहिए मुझे ज़िंदगी में न कुछ इसके बाद चाहिए। ........ #B#



