bhawna
Friday, May 22, 2015
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zindgi mei ab or koi chahat nahi ...... ae bewafa mujhe teri ab chahat nahi
(no title)
तरस गए हम तुमसे दो पल की गुफ्त-गु के लिए और लोग कहते हैं की तुम बोलते बहुत हो।. . . . . भावना
अधूरे है
अधूरे है हम तेरे बिना ये बात अब खुदसे भी छिपायँगे तरसोगे हमसे मिलने के लिए हम तुझसे दूर अब इतने चले जायेंगे
(no title)
तू चाहिए बस तेरा साथ चाहिए मुझे ज़िंदगी में न कुछ इसके बाद चाहिए। ........ #B#
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