bhawna
Saturday, June 27, 2015
मैं तनहा जरूर हुँ मगर मजबूर नहीं
इसलिए
ऐ दोस्तों मुझपर तरस खाकर गुनाह ना करना। .............भावना
चले तो जाते है लोग ज़िंदगी से अक्सर
पर उनकी यादो का कारवां उम्रभर के लिए ठहर जाता है। …………………… भावना
मेरे होने से कब किसको कुछ मिला है
पर इतना है यकीन मेरी कमी का हिस्सा सबको कुछ खला है
लूटा तो है मेरा जहां लेकिन
चमन -ऐ सुकून भी कहाँ किसी को मिला है…………भावना
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zindgi mei ab or koi chahat nahi ...... ae bewafa mujhe teri ab chahat nahi
(no title)
तरस गए हम तुमसे दो पल की गुफ्त-गु के लिए और लोग कहते हैं की तुम बोलते बहुत हो।. . . . . भावना
अधूरे है
अधूरे है हम तेरे बिना ये बात अब खुदसे भी छिपायँगे तरसोगे हमसे मिलने के लिए हम तुझसे दूर अब इतने चले जायेंगे
(no title)
तू चाहिए बस तेरा साथ चाहिए मुझे ज़िंदगी में न कुछ इसके बाद चाहिए। ........ #B#