bhawna
Monday, August 10, 2015
वो बात दिल से नहीं दिमाग से किया करते थे
जिनके लिए हम अक्सर घरवालो से लड़ लिया करते थे
ये जान ही नहीं पाये के उनके ज़ेहन में फरेब था
जिसके हर झूठ को भी हम सच मान लिया करते थे …………… भावना
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zindgi mei ab or koi chahat nahi ...... ae bewafa mujhe teri ab chahat nahi
(no title)
तरस गए हम तुमसे दो पल की गुफ्त-गु के लिए और लोग कहते हैं की तुम बोलते बहुत हो।. . . . . भावना
अधूरे है
अधूरे है हम तेरे बिना ये बात अब खुदसे भी छिपायँगे तरसोगे हमसे मिलने के लिए हम तुझसे दूर अब इतने चले जायेंगे
(no title)
तू चाहिए बस तेरा साथ चाहिए मुझे ज़िंदगी में न कुछ इसके बाद चाहिए। ........ #B#
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