bhawna
Sunday, September 13, 2015
किस् से कहे हम हाल -ए-दिल अपना
मिटा कर खुदको अब एक पहेली बन जाना चाहती हुँ। ………… भावना
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zindgi mei ab or koi chahat nahi ...... ae bewafa mujhe teri ab chahat nahi
(no title)
तरस गए हम तुमसे दो पल की गुफ्त-गु के लिए और लोग कहते हैं की तुम बोलते बहुत हो।. . . . . भावना
अधूरे है
अधूरे है हम तेरे बिना ये बात अब खुदसे भी छिपायँगे तरसोगे हमसे मिलने के लिए हम तुझसे दूर अब इतने चले जायेंगे
(no title)
तू चाहिए बस तेरा साथ चाहिए मुझे ज़िंदगी में न कुछ इसके बाद चाहिए। ........ #B#
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